कोरोना संकट से परे, सातवें माह में बांटी खनिज भण्डारण की खैरात

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प्रदेश के उमरिया जिले के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी का एक और कारनामा

भोपाल। समूचा विश्व और पूरे राष्ट्र सहित प्रदेश के लगभग जिलों में महामारी घोषित हो चुकी कोरोना को लेकर हाई एलर्ट किया गया है, प्रदेश के लगभग जिलों में कल होने वाले जनता कफ्यू को लेकर कलेक्टर्स और कमिश्नर तैयारियों में लगे हैं, जिलों में धारा 144 के आदेश जारी किये जा रहे हैं, कलेक्टर्स खुद चिकित्सा सुविधाओं और अन्य क्षेत्रों से आने वाले जिलेवासियों की स्क्रीनिंग में लगे हुए हैं, लेकिन प्रदेश के उमरिया जिला शायद अन्य आधा सैकड़ा जिलों के जुदा है, यही कारण है कि यहां कोरोना को लेकर प्रशासन के तमाम अधिकारी तो अलर्ट हैं, लेकिन कलेक्टर और खनिज अमले का ध्यान प्रदेश की बदलती राजनैतिक दशा के बीच रेत के भण्डारणों को बांटने में लगा हुआ है।
अगस्त में निरस्त हुए थे भण्डारण
अचरज और आश्चर्य की बात है कि शासन द्वारा 30 अगस्त 2019 को नई रेत नीति लागू की गई थी, जिसके तहत पूर्व में स्वीकृत सभी भण्डारणों को निरस्त कर दिया गया था, पूर्व में संचालित भण्डारणों की रेत की बिक्री के लिये एक माह की समयावधि शासन के द्वारा निर्धारित की गई थी, एनजीटी के नियम आने के बाद सीटीओ के चलते भण्डारण बंद करते हुए सीटीओ की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भण्डारण शुरू करने के आदेश दिये गये थे, प्रदेश के सभी जिलों में सीटीओ लाने के बाद 1 लाख घन मीटर तक भण्डारित रेत की स्वीकृति प्रदान करने के अधिकार कलेक्टर को सौंपे गये थे, उमरिया में कुछ भण्डारणों को स्वीकृतियां भी प्रदान की गई थी, लेकिन कुछ पर अवैध उत्खनन के प्रकरण होने पर रोक लगाई गई थी, जिनके प्रकरण अभी भी विचाराधीन है, लेकिन अब उन्हीं भण्डारणों को स्वीकृति देने की तैयारी है।
कोरोना के बीच भण्डारण को हरी झण्डी
पदस्थापना से लेकर रेत के कारोबार के मामले में सुर्खियों में रहे कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है, पंचायतों की खदानों पर माफियाओं का कब्जा और गैंगस्टर कनेक्शन उनका नाता रहा है, कोरोना संकट के बीच केन्द्र और राज्य सरकार रोकथाम के लिये तमाम प्रयास कर रही हैं, वहीं कलेक्टर ने बेल्दी स्थित आर.बी.लोजेक्सिट प्रोपराइटर संदीप वाजपेयी के रेत भण्डारण को इस आपात स्थिति में संचालन की अनुमति दे दी, लेकिन उमरिया में शायद बाड़ी ही खेत को खा रही है, जिला प्रशासन उमरिया द्वारा कोरोना संकट के बीच रेत भण्डारण की अनुमति देना चर्चा का विषय बना हुआ है।
करोड़ों का जुर्माना भूल, दी अनुमति
मानपुर तहसील के बेल्दी में संदीप वाजपेयी के आर.बी.लोजेक्सिट को रेत के भण्डारण की स्वीकृति खनिज विभाग के द्वारा 03 अक्टूबर 2018 को जारी की गई थी, कथित संचालक के द्वारा अवैध रूप से उत्खनन कर रेत को अपने भण्डारण में रखा जा रहा था, जिसके खिलाफ खनिज विभाग सहित संयुक्त टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए नदी से वाहन जब्त किये थे, भण्डारित रेत की जांच भी की गई थी, 4 करोड़ के आसपास का जुर्माना भी प्रस्तावित किया गया था, लेकिन लगभग आठ माह का समय बीत चुका है, जुर्माने की राशि वसूलने की बजाय कलेक्टर ने संचालक को भण्डारण के संचालन की अनुमति जारी कर दी।
उतरने लगी मशीन
बीते दिनों कलेक्टर के द्वारा रेत भण्डारण के संचालन की स्वीकृति प्रदान कर दी गई, आदेश मिलने के बाद संचालक और उनके कारिंदों ने नदियों को छल्लनी करने का काम भी करना शुरू कर दिया। जानकारी के मुताबिक रात्रि में मशीन लगाकर नदियों से अवैध उत्खनन कराकर रेत भण्डारित कराई जा रही है, शुक्रवार की रात्रि कुछ वाहन भी रेत लेने भण्डारण पहुंचे थे, लेकिन ईटीपी भोपाल से शुरू कर होने के चलते उन्हें लौटा दिया गया। शनिवार और रविवार को भोपाल में छुट्टी होने के चलते, अब सोमवार को ईटीपी संचनालय से चालू होगी जिसके बाद फिर से अवैध रेत का कारोबार उमरिया में दस्तक देगा।
कोरोना के बीच दूसरी प्रदेशों से पहुंचेंगे वाहन
मौजूदा समय में शहडोल, अनूपपुर, सीधी, सिंगरौंली, रीवा में न तो रेत की खदानें संचालित हो रही हैं और न ही कोई भण्डारण अस्तित्व में है, बेल्दी में अगर रेत का भण्डारण शुरू होता है, तो रीवा, सतना सहित प्रदेश के अन्य हिस्से से वाहन यहां पर रेत लेने के लिये पहुंचेंगे ही, उसके अलावा उत्तरप्रदेश के विभिन्न हिस्सों से भी वाहनों की आवाजाही बनी रहेगी, जिसके चलते कोरोना के संक्रमण के फैलने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है, लेकिन कलेक्टर ने पता नहीं कोरोना से निपटने के बजाय रेत के भण्डारण को शुरू कराना ही बेहतर समझा, यह तो वहीं बेहतर जान सकते हैं।
इनका कहना है
जुर्माने पर अभी फैसला नहीं हुआ है, स्वीकृति प्रदान की गई है, भोपाल से ईटीपी शुरू होगी, कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, इस बात पर गंभीरता से विचार करने के बाद ही अब निर्णय लिया जायेगी कि उक्त भण्डारण को स्वीकृति ऑनलाइन दिलवाई जाये या नहीं। कोशिश यह रहेगी कि आगामी आदेशों तक इस पर रोक लगा दी जाये।
श्रीमान सिंह बघेल
खनिज अधिकारी, उमरिया

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