प्रदेश की लाइफ लाइन नर्मदा हुई निर्मल

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पीसीबी ने 6 घाटो के लिए नमूने, नदी में कम हुआ प्रदूषण का स्तर
प्रदेश की जीवन दायनी नर्मदा नदी करोना से पहले प्रदूषण की चपेट में थी, लॉकडाउन के बाद से ही प्रदूषण के स्तर लगातार घटता चला गया, अब सभी प्रमुख घाटो पर नदी का पानी स्वच्छ हो गया है, हाल ही में 6 प्रमुख घाटो पर पीसीबी के द्वारा लिये गये नमूनों में इस बात की पुष्टि हुई है जो कि पर्यावरण और नदी संरक्षण के लिए बेहतर नतीजे सामने आये है।
अनूपपुर।
पवित्र नगरी अमरकंटक से निकलने वाली प्रदेश की लाइफ लाइन नर्मदा नदी में लॉकडाउन के बाद से लगातार प्रदूषण का स्तर घटता चला गया और जल स्वच्छ हो गया। शहडोल व महाकौशल संभाग में इसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिले है। उद्गम स्थल सहित डिंडौरी जिले के विभिन्न घाटो पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा लिये गये जल के नमूने और लैब में की गई जांच के बाद पहले की तुलना में जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। पहले पानी में प्रदूषण का स्तर पाया जाता था, लेकिन अब नदी का जल स्वच्छ हो चुका है, जो कि पर्यावरण के लिए सार्थक परिणाम लेकर आया है।
6 घाटो में हुई सैंपलिंग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय शहडोल के द्वारा नर्मदा नदी के उद्गम स्थल, पुष्कर डेम, कपिलधार के अलावा डिंडौरी जिले के चंदन घाट, डिंडौरी शहर और ग्रामीण अंचल में नर्मदा नदी के जल नमूने के नमूने एकत्रित किये गये और जिसकी जांच लैब में की गई, जिसमें हानिकारक तत्वो में भारी गिरावट देखने को मिली। जांच के दौरान यह सामने आया कि लॉकडाउन से नदी का जल स्वच्छ हुआ है।
प्रदूषण के स्तर में कमी

पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी संजीव कुमार मेहरा ने बताया कि नर्मदा नदी के जल के स्तर की गुणवत्ता में काफी सुधार आया है, लॉकडाउन से पहले प्रदूषण का स्तर नदी में पाया जाता था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान आक्सीजन और पीएच का लेबल घटा है, इसके साथ ही अन्य ठोस अपशिष्ठो की मौजूदगी भी कम पाई गई है, जो कि अच्छे संकेत है।
ये आये नतीजे
लॉकडाउन से पहले कई स्थानों पर पीएच का लेबल 7.82, टीडीएस 178, क्लोराइड 24.5, बीओडी 8.3, डीओ 6.9, एमपीएन 1.8 हुआ करता था, वही लॉकडाउन के दौरान इसमें भारी गिरावट देखने को मिली। पीएच का लेबल 7.9, टीडीएस 135, क्लोराइड 19.4, बीओडी 8.2, डीओ 7.7, एमपीएन 01.8 तक पहुंच गया है। अलग-अलग स्थानो पर की गई सैंपलिंग में सार्थक परिणाम देखने को मिले है। इसके पीछे नदी और घाटो पर मानव गतिविधियों का उपयोग होना भी एक कारण सामने आया है।

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