मैसूर के राजा ने बनवाई थी चुनाव में लगने वाली स्याही – अर्जुन

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शिरीष नंदन श्रीवास्तव 9407070665 

शहडोल। मध्यप्रदेश के  भविष्य का फैसला होने जा रहा, जिसमें प्रदेश के युवा वर्ग के साथ वृद्ध जन  अपनी ताकत अर्थात वोट देकर अपने समाज व देश हित में उत्कृष्ट उम्मीदवार को चुनेंगे, ब्योहारी निवासी एवं शासकीय आदर्श विज्ञान के शोधार्थी अर्जुन शुक्ला  ने बताया कि चुनाव के दौरान फर्जी मतदान रोकने में कारगर औजार के रुप में प्रयुक्त हाथ की उंगली के नाखून पर लगाई जाने वाली स्याही सबसे पहले मैसूर के महाराजा नालवाड़ी कृष्णराज वाडियार द्वारा वर्ष 1937 में स्थापित मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड कंपनी ने बनायी थी। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बन गई। अब इस कंपनी को मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड के नाम से जाता है। कर्नाटक सरकार की यह कंपनी अब भी देश में होने वाले प्रत्येक चुनाव के लिए स्याही बनाने का काम करती है और इसका निर्यात भी करती है।

*तीसरे आम चुनाव में पहली बार हुआ था प्रयोग*
चुनाव के दौरान मतदाताओं को लगाई जाने वाली स्याही निर्माण के लिए इस कंपनी का चयन वर्ष 1962 में किया गया था और पहली बार इसका इस्तेमाल देश के तीसरे आम चुनाव किया गया था। इस स्याही को बनाने की निर्माण प्रक्रिया गोपनीय रखी जाती है और इसे नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी आफ इंडिया के रासायनिक फार्मूले का इस्तेमाल करके तैयार किया जाता है। यह आम स्याही की तरह नहीं होती और उंगली पर लगने के 60 सेकंड के भीतर ही सूख जाती है।

*और किन देशो में होती है इस्तेमाल*
चुनाव के दौरान यह स्याही बाएं हाथ की तर्जनी उंगली के नाखून पर लगाई जाती है। एक फरवरी 2006 से पहले तक यह स्याही नाखून और चमड़ी के जोड़ पर लगाई जाती थी। यह स्याही इस बात को सुनिश्चित करती है कि एक मतदाता एक ही वोट डाले। भारत इस स्याही का निर्यात थाईलैंड, सिंगापुर, नाइजीरिया, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका को भी करता है।

*अब हल्के और पतले नहीं बल्कि मोटे और गहरे स्याही लगाए जायेगे*

सामान्य तौर पर चुनाव के दौरान स्याही वोटर को लगाई जाएगी। ये स्याही मोटे ब्रश से लगाने के निर्देश चुनाव आयोग ने जारी कर दिए हैं। मतदान अधिकारियों द्वारा वोटर पर स्याही का इस्तेमाल ढंग से नहीं करने की शिकायतों के बीच चुनाव आयोग ने यह निर्देश जारी किया है। हाल के आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह स्याही मतदाता के अंगुली पर ब्रश से लगायी जायेगी। इसे बायें हाथ की तर्जनी अंगुली के पहले जोड़ से लेकर नाखून के शीर्ष तक लगाया जायेगा। ब्रश के इस्तेमाल से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि स्याही का निशान न केवल गाढ़े बल्कि आकार में अधिक बड़े हो।
चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि नियंत्रण इकाई के मतदान बटन दबाने से पहले मतदाता की अंगुली पर स्याही का निशान मौजूद हो। चुनाव आयोग ने कहा कि यह आदेश इसलिए जारी किया जा रहा है क्योंकि हाल के चुनावों में आयोग को चंद रिपोर्ट ऐसी मिली थी कि न मिट सकने वाली स्याही को ढंग से नहीं लगाया गया।
इस बात की शिकायतें मिली हैं कि मतदान अधिकारी स्याही लगाने के लिए ब्रश की बजाय माचिस की तीली का इस्तेमाल करते हैं। स्याही मुश्किल से ही नजर आती है और इस तरह के आरोप लगते हैं कि लोग फिर से वोट डालने के लिए इसको मिटा देते हैं।
चुनाव आयोग ने मैसूर पेंट्स एंड वार्निश को राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को तुरंत प्रभाव से मतदान स्याही के साथ साथ ब्रशों की आपूर्ति भी सुनिश्चित करने को कहा है। कर्नाटक सरकार का यह उपक्रम मैसूर पेंटस मतदाताओं को लगायी जाने वाली इस स्याही की भारत में सभी राज्यों और कुछ अन्य देशों को भी आपूर्ति करता है। कंपनी का दावा है कि एक बार अंगुली पर लगने के बाद यह कई माह तक नहीं मिटती है जबकि खबरों में कहा गया है कि लगाये जाने के बाद लोग इसे मिटा लेते हैं।

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